कानपुर: आरटीओ में फेल हुई आनलाइन की सुविधा, आवेदकों को लगानी पड़ती है लम्बी लाइनें

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कानपुर, 15 मई। सरकारी कार्यों में बढ़ते बोझ को देखते हुए संभागीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने लाइसेंस बनवाने के लिए आनलाइन की सुविधा उपलब्ध करा दी। लेकिन यह सुविधा उनकी फेल साबित होती दिख रही है और आवेदकों को अलग-अलग जगहों पर लंबी लाइनें लगानी पड़ती है। जिससे आवेदकों का पूरा दिन कतारों में खड़ा होकर परेशान होना पड़ता है।

आरटीओ कानपुर में अधिकारिंयों द्वारा किया गया दावा कि, लाइसेंस बनवाने के लिए आवेदकों को लाइन नहीं लगानी पड़ेगी और आनलाइन व्यवस्था कर दी गई है। लेकिन जब इसकी हकीकत जानने के लिए टीम मंगलवार को सर्वोदय नगर स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय गई तो देखा कि हर काउंटर पर आवेदकों की लंबी लाइन लगी हुई थी। बताते चलें कि जिले में आनलाइन व्यवस्था को लेकर सरकारी बडे़-बड़े दावे किये जा रहे थे कि आवेदक फोटो खिंचाने आएगा और टेस्ट देकर घर जायेगा। लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही थी।

आवेदक फार्म तो आनलाइन इंटरनेट कैफों से भर देते हैं पर आरटीओ के बाबुओं से छुटकारा नहीं मिल रहा है। आवेदक यहां पर आकर काउंटर नम्बर 14 और नौ नंबर कमरा में बाबू को बाबू को प्रपत्र चेक कराते देखा गया। यही नहीं इन काउंटरों पर जांच करने वाले कर्मचारियों के साथ अवैध लोगों को भी बैठे देखा जा सकता है। उसके बाद फोटो के लिये लाइन में खड़ा होना फिर टेस्ट के लिये लाइन में आवेदको को लगना पड़ता है।

एक लाइसेंस बनवाने के लिए हर आवेदक को चार से पांच बार अलग-अलग जगहों पर लम्बी लाइनों में लगना पड़ता है। आनलाइन व्यवस्था पर आवेदकों को रोजाना अलग-अलग लाइनों में लग कर काम कराने पड़ रहे हैं। लाइसेंस बनवाने आये रविशंकर त्रिपाठी ने बताया कि दो दिनों से कार्यालय के इस काउंटर से उस काउंटर में लाइन लगाना पड़ रहा है, फिर भी लाइसेंस नहीं बन सका। यहां के बाबू इतना परेशान कर देते हैं कि लोगों को मजबूर होकर दलालों का सहारा लेना पड़ रहा है।

तो वहीं एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आनलाइन व्यवस्था कारगर साबित हो सकती है, लेकिन दलालों के माध्यम से आरटीओ प्रशासन आदित्य त्रिपाठी की कमाई बंद हो जाएगी। इसी के चलते आवेदकों को इस खिड़की से उस खिड़की भगाया जा रहा है।

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